शनिवार, 16 सितंबर 2017

फ़ानूस बन के जिसकी हिफाज़त हवा करे , वो शमा(शम्मा ) क्या बुझेगी जिसे रोशन खुदा करे।

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कनागत में बुलेट ट्रेन का उदघाटन करने पर मोदी पर छिद्रान्वेषण करने वाले मार्कवाद के बौद्धिक गुलाम तो धर्म को मानते ही नहीं इनके मुखिया तो इसे अफीम कह आएं हैं न ही इन भकुओं में से किसी को यह मालूम होगा कि कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश जिस अवधि में होता है उसे ही श्राद्ध पक्ष कहा समझा माना गया है। हैलोवीन इसी का थोड़ा अलग सा संस्करण है। ये देश तोड़क जो हर बात में देश का विरोध करते हैं ,स्वयं साक्षात जीवित प्रेत हैं। एक श्राद्ध इनके लिए भी होते रहना चाहिए।

इस मुद्दे पर हमने भारत धर्मी समाज के चंद नाम चीन लोगों से बात की है मुद्दा रोहंग्या मुसलमानों से भी जुड़ा। इन मुसलमानों को जिन्हें   लश्करे तैयबा के  एजेंटों ने भारत में आतंक फैलाने की नीयत से घुसाने की कोशिश की है  इनकी हिमायत में भी कई  सेकुलर सड़कों पर आ  गए हैं। भारतधर्मी समाज के मुखिया प्रमुख विचारक डॉ नन्द लाल मेहता वागीश जी ने इस का एक हल यह सुझाया है -ये तमाम लोग जिनमें से कई कुनबों के पास बे -हिसाब जमीनें हैं अपनी जमीन इन रोहंग्या मुसलमानों के नाम कर देवें साथ ही भारत सरकार को ये लिखकर देवें -इन रोहंग्या कथित शरणार्थी लोगों का वोट नहीं बनाया जाएगा।

मसलन अखिलेश ,लालू ,सोनिया के पास ही बे -हिसाब संपत्ति है। ये पहल करें इस दिशा में यदि सचमुच मानवीय पहलू  इनकी नज़र में है (जिससे इनका कोई लेना देना रहता नहीं है ),इनका एक ही एजेंडा है मोदी बैटिंग ,मोदी हैटिंग एन्ड हिटिंग। इन देश भाजकों को यह नहीं पता -

फ़ानूस बन के जिसकी हिफाज़त हवा करे ,

वो शमा(शम्मा ) क्या बुझेगी  जिसे रोशन खुदा करे।

जिसे वाह -  गुरु की कृपा प्राप्त है ,कृष्णा का आशीष जिसके साथ है मोहम्मद साहब की दुआएं जिसे प्राप्त हैं उसका ये चंद फुकरे क्या बिगाड़ लेंगे जो आज कनागत की बात करते हैं ,असहिंष्णु जिसे घोषित कर चुके हैं उस भारत से सहिष्णुता की आज ये बात करते मानवीय पक्ष की बात करते हैं।

मैं सरयू तीरे इन भकुओं का  तरपन करता हूँ। 

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